गीत · Reading time: 1 minute

होली रहन से खेलऽ

होली रहन से खेलऽ
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होली रहन से खेलऽ ये भइया होली रहन से खेलऽ

गारी तूँ देबऽ बहिनियो सुनी
बहिनियो सुनी आ मुनियो सुनी
उ सरम से अँखियो ना खोली-
ये भइया होली रहन से खेलऽ

मत फूहर-पातर गीत बजावऽ
बेटी-बहिन के मत लजवावऽ
न मारऽ तूँ कवनो टिभोली-
ये भइया होली रहन से खेलऽ

पाँकोँ से खेलबऽ बीमारी हो जाई
कि भरल थइली खाली हो जाई
मुँहवा से निकली ना बोली-
ये भइया होली रहन से खेलऽ

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 10/03/2014

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…
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