मुक्तक · Reading time: 1 minute

हियरा उदास हो जाला

क़भी कभार मनवा के ,ई एहसास हो जाला।
केहू दूर हो जाला ,केहू दिल के पास हो जाला।
केहू से दूर भईले के एहसास दिल से कबहुँ न
जाला,
पता तब चलेला ,जब हियरा उदास हो जाला।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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