गीत · Reading time: 1 minute

सोहर

आजु हमरे बेटी के छठियार के अवसर पर हमार लिखल सोहर——

अँगना में बेइली फूलइली, चमेली फफनइली नू हो।
ऐ बबुनी—-
महके ला घरवा दुअरवा, अँगन उठे सोहर हो।

सगरो सपनवा पुराईल, मन हरसाईल नू हो,
ए बबुनी—–
बिटिया जनमलू अँगनवा, अँगन उठे सोहर हो।

अन धन महरिन नउनिया, त माँगे ली नथुनियाँ नू हो,
ए बबुनी——–
बुआ मांगे सोना के सिकडीया, अँगन उठे सोहर हो।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य

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