मुक्तक · Reading time: 1 minute

विजया के शादी

केहू त पिटवा द गाँव भर मुनादी।
विजया बेचारा बलभर दुआ दी।
कवनो अगुआ कुछ कऽ नाही पवलें
एहू साल भएल न विजया के शादी।
-सिद्धार्थ

1 Like · 27 Views
Like
Author
अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
You may also like:
Loading...