मुक्तक · Reading time: 1 minute

ये दुनिया के नरक के बनावल?

एकरा पीछे केकर हाथ
एकरा पीछे केकर दोष
सोच सोच सोच सोच
सोच सोच सोच सोच….
काहे जिएला लोग इहां
अपना चाहत के गला घोंट
सोच सोच सोच सोच
सोच सोच सोच सोच….
काहे बा ये दुनिया में
एतना ज़्यादा रोक-टोक
सोच सोच सोच सोच
सोच सोच सोच सोच….
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
(A Dream of Love)

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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