मुक्तक · Reading time: 1 minute

मौसम बा मनभावन

सनसन सनसन पुरुआ डोले, रिमझिम बरसे सावन।
हरियाली आच्छादित धरती, लागे सुंदर पावन।
याद सतावे हरपल तहरो, मनवा नाहीं लागे-
घर आजा परदेसी बालम, मौसम बा मनभावन।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’

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