कविता · Reading time: 1 minute

मूरदन के देश

ज़िंदा रहतीं
जो हमनी के
आपन देश ना
मरीत कबो!!
सदियन से
एके दर पर
ई समाज ना
सड़ीत कबो!!
शिक्षा औरी
स्वास्थ्य नीअन
ज़रूरी सवाल
सब छोड़के!
जात-धरम के
चक्कर में
आपस में ना
लड़ीत कबो!!
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#BeRebel

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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