मुक्तक · Reading time: 1 minute

मुक्तक

सार छन्दाधारित मुक्तक–
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बादर गरजे बिजली चमके,आइल प्यारा सावन।
हरियाली चहु ओर दिखेला,लागेला मनभावन।
गूँज उठे कजरी गाँवन में,पड़ल बाग में झूला,
महुअरि पाके घर-घर रूचे, सब के ई ललचावन।।

**माया शर्मा,पंचदेवरी,गोपालगंज(बिहार)**

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