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माई

सून लागे घरवा अ सूने अंगनवा,
रहि रहि होश परे तोहरे अंचरवा,,
अचके में छोरि हमके गईलू तू माई,
ममता तोहार गईल रहे का ओराई,
जिनगी क केसे सींखब उपदेशवा,
रहि रहि होश परे तोहरे अंचरवा,,

कउसला जी रहें साथ अपने रघुनाथ के,
गउरा के दम पर सब जाने गननाथ के,
कउने जसोदा के सौपि गईलू हथवा,
रहि रहि होश परे तोहरे अंचरवा,,

केतनो भी गाढ़ परल जिनिगिया में माई,
हंसि हंसि दीहले रहलू कूल्हि निबटाई,
रामबान रहे माई तुहार मुसुकनवा,
रहि रहि होश परे तोहरे अंचरवा,,

बाबू जी त गईल बाटे टूटि एकदम माई,
अपना से करत आ विलग हमे भाई,
गईलें बिखर अब सगरो सपनवा,
रहि रहि होश परे तोहरे अंचरवा,,
– गोपाल दूबे

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