घनाक्षरी · Reading time: 1 minute

माई के ललनवा

बम चले गोली चले, उहँवा न बोली चले,
सीमवा प सीना तानि, खाडा बा जवनवा।

दुसमन वार करे, कोशिश हजार करे,
लजिया बचावऽ ताते, माई के ललनवा।

हर घड़ी हर छण, खाडा रहे दिन भर,
रहे चउकना देखऽ, सांझो रे विहनवा।

भारत माई क शेरऽ, करे ना तनिक देरऽ,
हँसत हँसत देला, सीम प परनवा।

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’

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