ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

मनवा गावे रे

ओ रे ओ मनवा गावे रे
ये जिनगी बीती जावे रे

नेक कमाई करि ले कच्छू
तू काहे पाप कमावे रे

दुःख हर ले संगी-साथी के
तू सुःख मे क्यों भरमावे रे

तन के गरब न करिबे कोई
खाक उड़े क्या ले जावे रे

हाथ कछू ना लागे बबुवा
इक दिन पन्छी उड़ जावे रे

•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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