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मत्तगयंद सवैया (भोजपुरी)

मत्तगयंद सवैया (भोजपुरी)
आज गुहार करे भगता धर ध्यान कहे प्रभु लाज बचाईं।
व्याधि हरीं हरि कोविड के मनु प्रान हरीं जिन आज बचाईं।
देश दशा सब रूद्ध दिखे जन शोक हरीं सब काज बचाईं।
आस लगाय खड़ा भगता अब आस पुरा निज ताज बचाईं।।

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D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…
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