सवैया · Reading time: 1 minute

मत्तगयंद सवैया छंद (भोजपुरी)

छंद- ०१
राम रमापति नाथ उमापति कष्ट हरीं जन के त्रिपुरारी।
टूटत बा अब आज मनोबल दूर करीं भय हे! बनवारी।
कोविड नाम महाभट पे बस वार करीं अब हे! प्रतिकारी।
नाथ कृपालु दया कर दीं जन प्रान बचे प्रभु कृष्ण मुरारी।।
छंद-०२
नाथ मनोबल साथ रहे भय दूर करीं अब हे! भयहारी।
रोवत आज गुहार करे सब नाथ हरीं दुविधा बनवारी।
काल खड़ा हर द्वार दयानिधि मांगत बा मनु जान भिखारी।
नाथ विलम्ब न आज करीं भव त्रास हरीं प्रभु कुञ्जविहारी।।
✍️ पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’

2 Likes · 36 Views
Like
Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…
You may also like:
Loading...