मुक्तक · Reading time: 1 minute

भोजपुरी मुक्तक

भोजपुरी मुक्तक
काल आइल अकड़ सब हवा हो गइल।
एक दूजे से दूरी दवा हो गइल।
जे विधाता बने के जुगत में रहे-
आज पहिले पहर अलविदा हो गइल।।

पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा मंशानगर
पश्चिमी चम्पारण
बिहार

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Author
D/O/B- 07/01/1976 मैं पश्चिमी चम्पारण से हूँ, ग्राम+पो.-मुसहरवा (बिहार) वर्तमान समय में दिल्ली में एक प्राईवेट सेक्टर में कार्यरत हूँ। लेखन कला मेरा जूनून है। Books: कुसुमलता (अभिलाषा नादान की)…
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