गीत · Reading time: 1 minute

भगतसिंह से सवाल

ऐ भगतसिंह, केकरा खातिर
तू फांसी पर लटकल रहलअ
तनी देख लअ ऊ का करेला
आपसे में के आन लड़ेला
ऐ भगतसिंह, जेकरा खातिर
तू फांसी पर लटकल रहलअ…
कहीं हिंदू-मुसलमान होता
कहीं दलित-बभनान होता
फूहड़ राजनीति के शिकार
इहां रात-दिन इंसान होता
आपसी भाईचारा घटेला
सामाज में नफ़रत बढ़ेला
ऐ भगतसिंह, केकरा खातिर
तू फांसी पर लटकल रहलअ…

‌‌ #Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#CommunalPolitics

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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