मुक्तक · Reading time: 1 minute

बेल होइ

जे जेल होइ त न बेल होइ।
दुइ चार बिगहा सेल होइ।
कोर्ट में चक्कर में चप्पल
घिस जाई,
जमानत में ठेलमठेल होइ।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

92 Views
Like
Author
अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
You may also like:
Loading...