ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

**बुद्धि से अब काम लीं**

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लाख आफत सामने बा,बुद्धि से अब काम लीं।
बा सहारा के जरूरत ,हाथ जाके थाम लीं।।१।।

आन से बा आन के का,का करबि ई जानि के,
जेकरा से बा गरज अब , ओकरा से काम लीं।।२।।

ना भलाई के ज़माना , बा इहां पर आज कल,
प्रीत बा नीलाम होखत,दाम दीं भा दाम लीं।।३।।

राति-दिन मूवल इहॉं पर,ठीक नइखे बेवजह,
ध्यान राखीं देहिं-जाङॅंर,एक छन आराम लीं।।४।।

छोड़ि के सब एक दिन बा चलि इहाॅं से दी सभे,
तब फिकिर कइसन अरे अब,राम जी के नाम लीं।।५।।

**माया शर्मा, पंचदेवरी, गोपालगंज (बिहार)**

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