ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

बुढ़ापा से मुहब्बत बा जरूरी

१२२२ १२२२ १२२

बुढ़ापा से मुहब्बत बा जरुरी।
बचा लऽ ई विरासत बा जरूरी।

शजर जड़ से जुदा हो के रही ना,
समझ लऽ आज निस्बत बा जरूरी। (निसबत-लगाव)

पिता तरुवर ह बरगद के समझ लऽ,
कइल करिहऽ हिफाजत बा जरूरी।

नयन से लोर ना आई कबो भी,
पिता जइसन अमानत बा जरूरी।

रहे आशीष जीवन भर पिता के,
सुनऽ ऐ ‘सूर्य’ किस्मत बा जरूरी

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

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