मुक्तक · Reading time: 1 minute

बीमार

कमर में दर्द चालू बा, तनिक धुधला नजर होता।
सभे बोले करऽ संयम, सुनऽ अब तऽ उमर होता।
रहल शूगर भइल पिलिया समझ आवे न बीमारी-
सुनाईं हाल का आपन दवाई पर गुजर होता।

#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’

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