मुक्तक · Reading time: 1 minute

बिरहनी जियरा

जाने मन के मितवा कहाँ गइल
‘अबहिये आ जाई’, कहत रहल

उनके कछु खोज न खबरिया मिले
बिरहनी जियरा भी दहल गइल

•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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