गीत · Reading time: 1 minute

बहे पुरवइया

पुरइन के पात नियर चिकन अंगनइया
बहे पुरवइया, मोरे अमरइया
बहे पुरवइया……..

कतहूँ बिरहिनिया के मन ना थिराला
अंसुअन से रोज रोज चउका लिपाला

राति राति भर खनके कहूँ कंगनइया
बहे पुरवइया……

कोइलरि के कुहू कुहू, पपिहा के पी पी
काँच काँच अमवन पर खूब चले सीपी

खटलुसवा खाजा पर बहके मनइया
बहे पुरवइया………

सावन में झुलुआ पर कजरी गवाला
फगुआ आ चइता में जिनिगी लिखाला

खेलें ‘असीम’ कबो घुमरी परइया
बहे पुरवइया……….
© शैलेन्द्र ‘असीम’

22 Views
Like
Author
10 Posts · 182 Views
शैलेन्द्र कुमार पाण्डेय उपाख्य : 'असीम' माता : स्व. द्रौपदी पाण्डेय पिता : स्व. सूर्यभान पाण्डेय पत्नी : श्रीमती प्रिया पाण्डेय पुत्रियां : श्रेया नव्या तन्वी शिक्षा : एम.एस-सी., बी.एड.,…
You may also like:
Loading...