मुक्तक · Reading time: 1 minute

बताईं रूप ई सुंदर खुदा कइसे सँवारे नी

कबो बिंदी कबो काजल, कबो नैना निहारे नी।
कबो लाली कबो बाली, निरखि जिनगी गुजारे नी।
बड़ी मासूम बा मुखड़ा, नजर तनिको हटट नइखे-
बताईं रूप सुंदर ई, खुदा कइसे सँवारे नी।
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#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य

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