ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

बंदगी हम का करीं

दिल दुखा के बा मिलल तहके खुशी हम का करी
दर्द में डूबल रहेला जिंदगी हम का करीं

कोठरी अंधेर के अब हो गइल आदत सनम
आस ना बाटे मिलन के रोशनी हम का करीं

रात-दिन सोचीले तहके माफ ना करिहें खुदा
ध्यान में बस तू रहेलू बंदगी हम का करीं

हम न कहियो दिल से तहके एक पल कइनी जुदा
हमके तू कहते रहेलू अजनबी हम का करीं

रात पूनम के हवे ‘आकाश’ जगमग ई जहाँ
ना मिले दिलदार तऽ ई चाँदनी हम का करी

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- २९/०८/२०२१

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संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…
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