मुक्तक · Reading time: 1 minute

फेसबुकिया बुखार

फेसबुकिया बुखार जेहके चढ़ जाता, दुइ बजे तक नेट चलावत बा।
व्हाट्सएप और मैसेंजर पर ,बारी-बारी मेसैज देख के आवत बा।
अच्छे – अच्छे कुरूप लइकन के भाव बढ़ा दिहले फेसबुक,
आसम, बीयूटीफुल , सो नाइस लिख के लोगवा मन मे गरियावत बा।
-सिद्धार्थ

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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