मुक्तक · Reading time: 1 minute

परोरा -परोरी

परोरा महंगा होई गईल बा ,परोरी के भी दाम बढ़ा द।
परोरा परोरी के हीत नात में ,आलू पियाज के नाम चढ़ा द।
तबतक बंडा कूद पड़ल कहले हमहू त महंगा बाटी,
हम कोर्ट से रेट बढ़वा के रहब, हमरे ऊपर इल्जाम चढ़ा द।
-सिद्धार्थ

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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