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नून रोटी दाल मँहगा हो गइल

#वज़्न – 2122. 2122 2122 212
#अर्कान – फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन
#बह्र – बह्र: बहरे रमल मुसमन महज़ूफ़
#काफ़िया – ई स्वर
#रदीफ़ – गैर मुरद्दफ़ (#क़ाफ़िया_ही_रदीफ़ है)

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प्यार ईश्वर, प्यार पूजा, प्यार हउए बंदगी।
प्यार तहरे से करीं हम यार तू ही जिंदगी।१

वक्त पर ना साथ देला लोग सब आपन हवे,
स्वार्थ में लिपटल मिलेला हर घड़ी अब आदमी।२

नून रगड़ल घाव पर अब हो गइल फैसन इहाँ,
लोग तफरी ले रहल बा देखि नैनन के नमी।३

देखि के नीचे न चलबऽ, चोट लागी जानि लऽ,
गैर के इल्ज़ाम ना दऽ, झाँक लऽ आपन कमी।४

एक मुखड़ा पर कई मुखड़ा नजर आवत हवे,
ओठ के मुस्कान सगरो आँसुअन के हऽ लड़ी।५

नून रोटी दाल मँहगा हो गइल बा देखि लऽ,
हाय अब बेरोजगारी जान ले के ही रही।६

भूख बीमारी करे लाचार सबके रोज दिन,
‘सूर्य’ जीयल हो गइल अब देखि लऽ मुस्किल बड़ी।७

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

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