गीत · Reading time: 1 minute

निर्गुण

भोरे-भोरे गवना
करवले जाला बलमा
कांचे उमिर में
लेहले जाला सजना…
बीच ही में छूटल
गुड़िया के खेलवा
सखियन से हमके
बिछड़वले जाला सजना…
ना कुछ देखनी
ना कुछ सुननी
बचपन के गंउवा
छोड़अवले जाला सजना…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#Nirgun

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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