गीत · Reading time: 1 minute

निर्गुण

माया के
नगरिया में
भूल मत जईहअ!
मोह के
फंसरिया में
झूल मत जईहअ!!
सपना के
रोटिया से
पेट ना भरेला!
जीत के
नींदिया में
फूल मत जईहअ!!
सोना के
मिरगा पीछे
भाग-दौड़ करके!
तू अपना
प्यारी सीता के
कबो मत गंवईहअ!!
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#nirgun

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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