मुक्तक · Reading time: 1 minute

धर्म के धंधा

काहे खातिर
रंग-नस्ल बा
काहे खातिर
जात-पात!
काहे खातिर
पूजा-पाठ बा
काहे खातिर
रीति-रिवाज!
दीन-धरम के
नाम से जवन
खेल चलेला
दुनिया भर में!
जबसे थोड़ा
होश संभलनी
सब लागेला
हमके बकवास!
Shekhar Chandra Mitra
#KabeerReturns

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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