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देहिया मेल खोजअता (हँसी ठिठोली)

बुढउ बाबा बड़बड़ात रहलन आ दुगोला प्रोग्राम से बीचे मे खिसियाअ के उठ के चल दिहलन. बाबा बड़बड़ाएत जात रहलन आ कहत रहलन जे आजकल के हई बिरहा गाबे वला, दुगोला ब्यास लोगन आ ओकरा साथे जे बजनिया नचनियाँ सब बाड़ें सबे बेलाजा हो जा रहल बा. हइ देखअ त लोगवन जैसने लइकि ब्यास गबलस की टूटे नाहिं पलंग, देहिया बथता अलंग, ए रजउ देहिया मेल खोजता. मास्टर धुन बजौलस की लइकबा सब नाच नाच के रूपैया लूटा दिहलस. बांकि हमनी के बूढ़ पूरानी कभी एक कप चाह पियाबे खातिर कहेम त ई सब लइकबा सब लौंडा पचीसी करे लंगिहे जे खुदरा पैसा नइखे? हमनी दोसरे दिन पिया देब आज राउड़ अपने पैसबा से पी ली. बताबअ एतने जे देहिया मेल खोजअता त घरे चल जो आ जाके केबारी बन्न कर ले. यहमा लइका बचा के मन बिगारे के का जरूरी बा?

बाबा आगू आगू जात रहलन आ हमनीयो बाबा के पाछू हो गइनि जे का सब कहअ तारन. एने कैमरा मैन के कह देले रहनू जे तो रेकार्डिंग करत रहअ हम दस मिनट मे आबअ तानी. हमहूँ बाबा के पाछू आबत रहनी त हुनका से पूछ देनी ए बाबा का भइल ह जे हेतना खीसिआइल बानी? हमार सवाल सुनके बाबा औरी खिसिया के कहे लगलन भाख मरदे अभी हमार मन पिताइल बारे आ तू मीडिया वला सब औरी हमार देह मे आगी लगाबे चलल? वैसने नू जैसे केहू के घर मे आगि लागल रहेला आ तोहनी पत्रकार सब पूछेला जे अब कैसा महसूस कर रहें है?

हम बाबा के समझैनी जे अइसन बात नइखे हमनी के तनी आपसे बतियाइ के बा. आईं रौउड़ा संगें लिट्टी खात बानी आ फेर चहबा पी लिहल जाइ. एतना सुन के बाबा कहलन ठीक बा. हमनी दुनू लोग लिट्टी खइला बाद चाह पीये गइनी. उंहे पर हुनका से पुछनी हम जे ए बाबा आज राउड़ कौने बात पर एतना खिसिआइल बानी जा? बाबा कहे लगलन कैसे ना खिसियाईं? हई बताबअ बिरहा मे गाबता जे देहिया मेल खोजता त बताबअ सयान लइकबा सब बिगड़ी की ना? आ हइ नएका लइका सब आरा परहे जाइ आ भर दिन इहे फेर मे रहअता? मरद मेहरारू बला बात ओकरा तू मीडिया वला सब का कहेलअ, हम कहनी बेडसीट की बातें, त बाबा कहे लगलन हं उहे बात बताबअ त लइका बच्चा के सुनाबे के चाही?

ए किशन बबुआ तोह केतना खिस्सा बताएम? हइ देखअ एक जगह दुगोला मे गाबत रहलन जे पियबा से पहिले हमार रहलू, त चोली मे टीस मारअता, इहे बतिआ सब सुनके त लइकिया सब सेहो फैसन बना लेले बिया आ बियाह से पहिलेहिं सब कुकर्म अपकर्म कर लेबेली. बताबअ भोजपूरी गाना सब केतना अशलील होखे जात रहलबा? समाज पतन के ओर जा रहल से केहू के चिंता बा? ना नू? उपर से बतीस, नीचे से छत्तिस, जिंस ढिला करअ? हम पूछनी जे ए बाबा त रउरो माजा लीं. बाबा कहलन ए मरदे हम त एक बार एगो ब्यास से पूछनी जे जिंस ढिला करअ काहे गाबत रहलअ त गबैया कहलस जे ए बाबा खरे खरे जतरा बन जाई त घरहीं जाए का ना परी. बताबअ मरद होखे की मेहरारू सबे आजकल बेलाजा हो गइल बा. अरे मरदे जौन काम घरहीं पे केबार बन्न होके हो सकेला उ पब्लिक के बताबे के का जरूरी बा?

लइका बच्चा सब गंदा गाना सुन के बिगर रहल बा समाज मे चरित्र उठल जा रहल बा केहूके चिंता बा? सब स्टार बने के फेर कुछो से कुछो गाबेला बजाबेला सन. हमनीयों के जमाना मे मरद मेहरारू के गप होत रहलन एकदम झांपल, उहे मे बिरह, पिआर, देश समाज के बात होत रहलन आ एगो मर्यादा गरिमा बनल रहल. बांकी आजकल त गंदा गाबे के एखो रिबाज हो गइल. एतने मे हम पूछ देनी जे ए बाबा हउ लइकि डांसर रउड़ा दिस इशारा करके काहे गाबत रहली जे लइकबा तोहरे के पापा कहअता आ हमरा सैंया जी के चाचा कहअता? बाबा कहे लगलन ए मरदे तोहनीयो मीडिया वला ब्रेकिंग न्यूज बना के मानबअ का लोगन. इहे बतिया यदि हमार बूरही से कह देब त उ तुरंते कहीं जे डी एन ए टेस्ट करां के आई ना त घर ना घूंसे देब. आ टेस्ट रिपोर्ट डांसर दिसी चल गइल तब त हम अपना देही मे सटे ना देम?

कथाकार- डाॅ. किशन कारीगर
(©काॅपीराईट)

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कवि परिचय:- किशन कारीगर ( मूल नाम- डाॅ. कृष्ण कुमार राय). जन्म:- 5 मार्च 1983ई.(कलकता मे)। शिक्षाः- पीएच.डी(शिक्षाशात्र), एमएमसी(मास कम्युनिकेशन),एम्.एड,बी.एड, पि.जी.डिप्लोमा(रेडियो प्रसारण) । मैथिली/हिंदी/ बांग्ला मे किशन कारीगर उपनाम से…
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