मुक्तक · Reading time: 1 minute

देवदास के पारो

का कही सखी, हमार सजन छिन गइल
हम तो केहूके ना रही… बस सुन रहल

का कही, देवदास के पारो लगी हम
अब तो शरत जी के किरदार बन गइल
•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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