गीत · Reading time: 1 minute

दिस इज हई का ह ,दिस इज हउ का ह

उत्तर परदेश का ह और लखनऊ का ह।
ई भैया आजुमगढ़ का ह ,ई मऊ का ह।
भैया विदेश से इन्ग्रेजी सीखे है सबसे कहत हैं,
दिस इज हई का ह ,दिस इज हउ का ह।
हालत खराब हो जाई ,जब हम पनिया के वाटर कहब।
घरवा के हाउस कहब और कमरा के क्वाटर कहब।
सब लोग काऊ कहा ई गऊ- गऊ का ह।
दिस इज हई का ह ,दिस इज हउ का ह।
जब हम झन्नाटेदार इन्ग्रेजी, उहा बोलत रहलीं।
ई अउवा पौवा नाही ,इंग्रेजी बॉटल खोलत रहलीं।
बार्ली से बनेला हम जानेली, ई जऊ का ह।
दिस इज हई का ह ,दिस इज हउ का ह।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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