मुक्तक · Reading time: 1 minute

तुम हो हमरी प्रितमा पहली

काहे हांक लगावत रहली
तुम हो हमरी प्रितमा पहली

तुम तो निस्ठुर सुनत नहीं बा
हमने जी की बातें कहली

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