ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

तिरंगा

मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२
क़ाफिया-आन, रदीफ-बा

बा कहीं अल्ल्लाह ईश्वर, राम रब भगवान बा।
एक ही बाटे तिरंगा, एक हिंदुस्तान बा।

भेष-भूषा जाति मजहब, बा अलग बोली मगर।
दिल बसल सबके तिरंगा, देश के पहचान बा।

बा समर्पित रक्त सगरो, काम आवे देश के,
हिंद के हर देशवासिन, के इहे अरमान बा।

बुद्ध के धरती हवे, सबके जिगर में प्रेम बा,
हिंद के वासी हईं, हमरा इहे अभिमान बा।

चन्द्रशेखर अरु भगत आजाद के धरती हवे,
जे वतन पर जान छिड़कल सूर्य ओकर शान बा।

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य’
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

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