कविता · Reading time: 1 minute

तालिबान के वापसी

जात-पात या रीत-रिवाज
बस भरम लागेला हमके!
आतंकवाद धारमिकता के
फल चरम लागेला हमके!!
धरम के नाम पर देखले बानी
अइसन-अइसन कुकरम कि
अपना के धारमिक कहे में
अब शरम लागेला हमके!!
Shekhar Chandra Mitra
#FreedomOfSpeech

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