मुक्तक · Reading time: 1 minute

तनिक मुस्काए दो

का जी, सुरति रगड़त बानी, तनिक बनाए दो
हमउ भी चबाई ससुर, तनिक मुस्काए दो

निन्दिये आवत रहल, सोइ मगर कइसन हम
टूट गइल खाट हमार, रहल ओकरे पाए दो

•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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