ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

दोऊ पाटन मा हर कोई पिसेला

जो यार रुठेला
तो साथ छुटेला

जो प्यार करेला
तो यार मिलेला

दोऊ पाटन मा
हर कोई पिसेला

छूटी नौकरिया
तो भूखे मरेला

फोकट पानी मा
ई पकोरे तलेला

बिरहा के दुःख मा
दिल यार जलेला

राम भजो मनवा
सब पार लगेला

ई सच कड़वा बा
तो होंठ सिलेला

थोरा घूमे फिरे
बाजार चलेला

तू जो ना करि दे
तो और पटेला

जो साथी रूठे
तो हाथ मलेला

मालिक के भरोसे
धनहीन पलेला
•••

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