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जय बाबा विश्वकर्मा

घनाक्षरी सृजन

बाबा विश्वकर्मा जी के, नमन करत बानी,
देव शिल्पी नमवा से, जाने ला जहनवा।

परबत नदी नाला, झरना करेला हाला,
उहे सिरजवनीं हँ, धरती गगनवा।

महल अटारी सब, चमकत गाड़ी सब,
उहे नू बनावतानी, कल करखनवा।

धर्म पुत्र ब्रह्मा जी के, शिल्प में निपुण हईं,
सत्रह सितंबर के, होखेला पुजनवा।

(स्वरचित मौलिक)
#सन्तोष_कुमार_विश्वकर्मा_सूर्य
तुर्कपट्टी, देवरिया, (उ.प्र.)
☎️7379598464

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