कविता · Reading time: 1 minute

जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला(भोजपुरी)

जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला
लोर बहैला आखि से मागिया सजे करैज तरसैला
जिनगी सभालि कैसे फुनुगी हमार से लप्पकैला
घनि बँसवरिया मिली कैसे आई लोगन मन ठनकैला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

प्यार काहे पाप होला दिने दिने देहिया भखरैला
बाबू माई के चक्कर मे तेजि माहुर खाय कल कहकैला
चिरई चुगलपन करैला छिप्पे पर,नाग देख हमरा डरैला
प्यार पागलपन काहे होला,जहान से भटकैला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

आँखि में लोर,मन में पीरा बा पोसल खुन लहरैला
जिनिगी से जूझत बानी,मौत नाहि काहे आबैला
झंखत बानी फाटल करैज रैल जैसे धक धक धडकैला
गलती कयनि अपने से,फासि जेसै सजा भी पाईला
जब जब देखिला अँजोरिया मन हमार बिहुसेला

मौलिक एवं स्वरचित
© श्रीहर्ष आचार्य

10 Views
Like
Author
मेरा नाम –विधा नन्द सिंह(उपनाम-श्रीहर्ष आचार्य ), शिक्षा-स्नातक(वनस्पति विज्ञान,इतिहास), स्नातकोत्तर(वनस्पति विज्ञान ) ,MBA जन्म तिथि-1996 मैथिली, हिन्दी, मगही,खोरठा,अंग्रेजी,भोजपुरी,अवधी,ब्रजभाषा और अन्य भाषाओं मे गीत, कविता,गजल, दोहा, उपन्यास लेखन नौकरी-टीकाकरण पदाअधिकारी जल्द…
You may also like:
Loading...