ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

छोटन-मोटन बात करत हो

छोटन-मोटन बात करत हो
हमरे संग ही घात करत हो

ई जिनगी बा, खेला नाही
काहे शय-ओ-मात करत हो

दिन बोला जब दिन होवे
काहे दिन मा रात करत हो

मानबता भुलिके बबुआ तुम
बेकार जात-पात करत हो

काहे सु:खवा के आंगन मा
दु:ख से दो-दो हात करत हो

•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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