लोकगीत · Reading time: 1 minute

चैती

चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ

रचि रचि धनिया भोज बनवली
सोने के थाल में जेवना सजवली
जेवेलें बारहों बिजनवाँ हो रामा
अइलें सजनवाँ

बाल गोपाल संघे फुलवो फुलाइल
पेन्ही के पियारिया मन अगराइल
निरखे ले सइंया सेजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ

पोरे पोरे प्यार सजन बरिसावेलें
ललका गुलाब मोरे जुड़ा में लगावेलें
मारेले तिरछी नजरिया हो रामा
अइलें सजनवाँ

चहकेला घरवा दुआरवा हो रामा
अइलें सजनवाँ

गणेश नाथ तिवारी”विनायक”

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