कविता · Reading time: 1 minute

ग्लोबल विलेज

ना कहीं भारत होखे
ना कहीं पाकिस्तान होखे
एक पूरा ज़हान होखे!
ना केहू हिंदू होखे
ना केहू मुसलमान होखे
एक सगरी इंसान होखे!
काहे ना हमनी के
आज मिलजुल के
कईल जाव दुआ इहे!
हरा-भरा धरती होखे
खुला-खुला आसमान होखे
एक नया उड़ान होखे!

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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