गीत · Reading time: 1 minute

गौरा के ललना

आवे न रउरे बिना चैना
गौरा के ललना।-२
ये हो गौरा के ललना ,
ये हो गौरा के ललना।
आवे न रउरे बिना चैना
गौरा के ललना।
दर्शन जब आपके पाइब।
लडुअन के भोग लगाइब।-२
दिन होखे चाहे होखे रैना,
गौरा के ललना।
आवे न रउरे बिना चैना
गौरा के ललना।
मस्तक सोहेला चंदन।
हम करी राउर वंदन।-२
किरपा मोपर प्रभु करना,
गौरा के ललना।
आवे न रउरे बिना चैना
गौरा के ललना।
कंधवा जनेऊ साजे।
संग ऋद्धि-सिद्धि विराजें।-२
मूसक सामने देले धरना,
गौरा के ललना।
आवे न रउरे बिना चैना
गौरा के ललना।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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