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गोसाईं जी के मुसवा

याद बा भैया? जब आइल रहे मुँह -नोचवा।
बोरा में लइकन के उठा ले जा धकरकोसवा।
बाद में पता चलल कि ई सब अफवाह हे,
असली में खइले पिसान गोसाईं जी के मुसवा।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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