ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

गजल

सतावल करेला सुबह शाम हरदम।
पढ़ावल करेला हरे राम हरदम।।

थकल बा हमेशा कमासुत शहर के।
लगावल करेला नरम जाम हरदम।।

सुबह नींद टूटल तमाशा बनवलस।
बतावल करेला जबर काम हरदम।।

गजब के उ कइलसि परम प्रेम हमसे।
रटावल करेला अपन नाम हरदम।।

कहेलन विनायक रही बाँचि उनसे।
करावल करेला उ बदनाम हरदम।।

गणेश नाथ तिवारी”विनायक”

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