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कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी

कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी सतावल करेला।
कबो चल जाला कबो आवल करेला।
सावधान रहिह भैया बड़ा ह बेदर्दी ई,
असावधानिए में ई मुआवल करेला।
कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी सतावल करेला
कुछ न ठिकाना एकर कब चल आई।
अभिन ले आइल न एका कारगर दवाई
भीड़ भाड़ में चक्कर ई लगावल करेला।
कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी सतावल करेला।।
कुहड़ बोखार होला आवे कुहड़ खाँसी।
शरीर कमजोर होला आवेला उबासी।
छींक भी अब जियरा घबरावल करेला।
कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी सतावल करेला।
एकरे हो जइले पे केहू लग्गे न आवेला।
मुँह के स्वाद बिगडेला कछु न भावेला।
सब केहू दुरहीं से बतियावल करेला।
कोरोनवा बेदर्दी बेदर्दी सतावल करेला।
-सिद्धार्थ गोरखपुरी

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अपने वक्त को एक आईना दिखा जाऊँगा। आज लिख रहा हूँ कल मैं लिखा जाऊँगा।। -सिद्धार्थ गोरखपुरी
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