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किसान के आत्महत्या

भैय्या किसनवा रे
देखल ना जाला दुखवा तोर
भैय्या किसनवा रे…
(१)
कहीं सुनाला जब
तोर बिपतिया
दरदे के मारे फाटे
लागेला छतिया
हो जाला हमरो मनवा थोर
भैय्या किसनवा रे…
(२)
एक तअ मुड़िया पर
करजा लादाइल
दूसरे दम घोंटे वाला
क़ानून आइल
जइसे होला फांसी के डोर
भैय्या किसनवा रे…
(३)
अदालत के मुंहवा में
ताला लगल बा
अफसर के पहिले से
हाथ बंधल बा
मीडिया करेला तोर-मोर
भैय्या किसनवा रे…
(४)
गरीब-गुरबा जनता के
हाल ना पूछअ
मंतरी आ संतरी के
चाल ना पूछअ
जाता ई देसवा कवने ओर…
#Geetkar
Shekhar Chandra Mitra
#FarmersProtest
#जनवादीगीत

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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