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कलम के मज़दूर: प्रेमचंद

हम तअ कलम के मज़दूर हईं
खानी आपन कमाई!
जबले बढ़िया कुछ लिख ना लेब
हमरा नींद ना आई!!
कवनो ईनाम के लालच में या
कवनो सजा के डर से
हमार क़लम अमानत हअ देश के
हमसे ई ना बेचाई!!
A Tribute To Premchand
By
Shekhar Chandra Mitra

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Lyricist, Journalist, Social Activist
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