ग़ज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

ओ हमार आलिया

ओ हमार आलिया
काहे जी चुरा लिया

क्यों झलक दिखाइके
काहे जी लगा लिया

खत लिखत, व्यथा कहत
तोसे प्रेम पा लिया

चारवा समझि तुझे
लालुआ भी खा लिया

मोहजाल तोहरा
मैँ खुदा को पा लिया

जाने नाहि प्यार तू
क्यों कहे फंसा लिया
•••

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एक अदना-सा अदबी ख़िदमतगार Books: इक्यावन रोमांटिक ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); इक्यावन उत्कृष्ट ग़ज़लें (ग़ज़ल संग्रह); 'इक्यावन इन्द्रधनुषी ग़ज़लें' (ग़ज़ल संग्रह) प्रतिनिधि रचनाएँ (विविध पद्य रचनाओं का संग्रह); रामभक्त शिव (संक्षिप्त…
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