गीत · Reading time: 1 minute

एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो

एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो
■■■■■■■■■■■■■■■
एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो।

पावल जे कुर्सी संसद में भाई,
ओकर ना बारिश में कुछउ भिलाई।
रही निहाल ऊ त बिहने भा परसो-
एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो।

बारिश में देखऽ छाता बा छूटल,
लागल बा पानी कि सड़क बा टूटल।
सब केहू रोवे नेता लो हरसो-
एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो।

चूवेला मड़ई त गांव भर छावे,
लिहल जे वोट ऊ झांके ना आवे।
ओकर बा चानी तरसे ऊ तरसो-
एक मुठी सरसो पीट पीट बरसो।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- 20/07/2020

नोट- मुखड़ा एगो लोकोक्ति/कहाउत हऽ।

1 Like · 28 Views
Like
Author
संक्षिप्त परिचय : नाम- आकाश महेशपुरी (कवि, लेखक) मो. न. 9919080399 मूल नाम- वकील कुशवाहा जन्मतिथि- 15 अगस्त 1980 शैक्षिक योग्यता- स्नातक ॰॰॰ प्रकाशन- सब रोटी का खेल (काव्य संग्रह)…
You may also like:
Loading...